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Aaj ki baat
डिक्टेटर का समापन भाषण

महान फ़िल्मकार चार्ली चैपलिन की कालजयी फिल्म ‘द ग्रेट डिक्टेटर’, जो हिटलर के ऊपर बनाई गई थी, के अंतिम अंश में हिटलर भाषण देता है.

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राजेश जोशी का पुरस्कार वापसी पर ख़त

 

बाज़ आयें चालबाजियों से

संजीव कुमार

आज जब भाई गौरीनाथ की फ़ैसलाकुन धमकी के बाद यह टिप्पणी लिखने बैठा हूँ, मोदी को बिहार की जनता की ओर से करारा जवाब दिया जा चुका है. साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की निर्लज्ज कोशिशों और विकास की हवाई बातों को उसने निर्णायक स्वर में नकार दिया है. फेसबुक पर जो चर्चाएँ चल रही हैं, उनमें से एक यह है कि अब आरएसएस

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सांप्रदायिक फ़ासीवाद का उभार और लेखकीय प्रतिरोध का समय

चंचल चौहान

निराला की एक कविता है : ‘राजे ने अपनी रखवाली की।‘ यह साफ़तौर पर वर्ग-विभाजित समाज में शोषकवर्ग के वर्चस्व से जुड़ी असलियत खोलती है →

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Press Vigyapti

प्रो. आफ़ाक़ अहमद  नहीं रहे

नयी दिल्ली : 30 मार्च : उर्दू के जाने-माने अफ़सानानिग़ार, नक्काद, शायर और जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. आफ़ाक़ अहमद का भोपाल में कल देर रात इंतकाल

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उर्दू लेखकों पर लादी गयी अपमानजनक शर्त

नयी दिल्ली : 22 मार्च : एक साल पहले लिए गए फ़ैसले के अनुसार नेशनल काउंसिल फ़ॉर प्रमोशन ऑफ़ उर्दू लैंग्वेज (NCPUL) ने थोक ख़रीद हेतु वित्तीय मदद के लिए आवेदन करनेवाले उर्दू लेखकों

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ज़ुबैर रज़वी नहीं रहे

नयी दिल्ली : 21 फरवरी : जनवादी लेखक संघ परिवार अपने कार्यकारी अध्यक्ष और उर्दू के बड़े अदीब श्री ज़ुबैर रज़वी की आकस्मिक मौत की ख़बर से स्तब्ध और शोक-संतप्त है. ज़ुबैर साहब कल दिनांक 20-02-2016 को              

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जाधवपुर विश्वविद्यालय में नारेबाज़ी

नयी दिल्ली : 17 फरवरी :जाधवपुर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की देश विरोधी नारेबाजी की हम जनवादी लेखक संघ की ओर से निंदा करते हैं। उनके प्रदर्शन का वामपंथी छात्रसंगठनों से कुछ भी लेनादेना  नहीं है 

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दिल्ली पुलिस ‘व्यभिचारी का बिस्तर’ बनने से बाज़ आये

नयी दिल्ली : 17 फरवरी : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया, इन दोनों से जुड़े मामलों में आरएसएस-भाजपा और उसके इशारे पर काम करती दिल्ली पुलिस का रवैया  →                                   आगे पढ़ें

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रोहित वेमुला की आत्मह्त्या पर साझा बयान

नयी दिल्ली : 25 जनवरी गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर हम लेखक और संस्कृतिकर्मी भारतीय गणतंत्र की संकल्पना पर आये उस संकट के प्रति अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हैं जिसे हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी रोहित वेमुला की आत्महत्या ने एक बार फिर गहरे अवसादपूर्ण रंगों में रेखांकित कर दिया है.

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रवींद्र कालिया  नहीं रहे

नयी दिल्ली : 10 जनवरी 016: लीवर सिरोसिस की असाध्य बीमारी से सालों संघर्ष करने के बाद रवींद्र कालिया कल इस दुनिया में नहीं रहे. वे साठोत्तरी कहानी के

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पंकजसिंह का निधन

नयी दिल्ली : 27 दिसंबर : जनवादी लेखक संघ हिन्दी के महत्वपूर्ण कवि, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता पंकज सिंह के आकस्मिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करता है. दिल्ली के अपने आवास में 26-12-2015 को दिल के दौरे से

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अभिनेता आमिर ख़ान के बयान पर

नयी दिल्ली : 25 नवंबर : रामनाथ गोयनका एक्सेलेंस इन जर्नलिज्म़ अवार्ड्स के आठवें संस्करण के मौक़े पर अभिनेता आमिर ख़ान ने

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अनुपम खेर के ‘मार्च फॉर इंडिया’ पर

नयी दिल्ली: 8 नवंबर, कल अनुपम खेर के नेतृत्व में भारत की सहिष्णुता के अक्षत होने का दावा करते हुए जो ‘मार्च फॉर इंडिया’ आयोजित

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नयी दिल्ली :  23.10.2015 : लेखकों, पाठकों, संस्कृतिकर्मियों का एक मौन जुलूस

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MEMORANDUM TO THE EXECUTIVE BOARD OF SAHITYA AKADEMI

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जलेस, जसम, प्रलेस, दलेस और साहित्य-संवाद ने जारी की यह प्रेस विज्ञप्ति

नयी दिल्ली : 24 अक्टूबर : साहित्य अकादमी के कार्यकारी मंडल ने लेखकों-कलाकारों के ज़बरदस्त विरोध के दवाब में जो प्रस्ताव कल पारित किया है, वह न सिर्फ़ चिंताजनक रूप से अपर्याप्त, बल्कि ग़लतबयानी का एक निर्लज्ज नमूना

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आज़ादी और विवेक के पक्ष में प्रलेस, जलेस, जसम, दलेस और साहित्य-संवाद का साझा बयान और आगामी कार्यक्रमों की सूचना

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वीरेन डंगवाल नहीं रहे

नयी दिल्ली : 29 सितंबर : जनवादी लेखक संघ हिंदी के प्रतिष्ठित कवि श्री वीरेन डंगवाल की मृत्यु पर गहरा शोक प्रकट करता है. वे लम्बे समय से कैंसर से   →आगे पढ़ें

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दसवां विश्व हिंदी सम्मलेन

जनवादी लेखक संघ का बयान

भोपाल में आयोजित दसवें विश्व हिंदी सम्मलेन को हिंदी साहित्य और साहित्यकारों की छाया से जिस तरह दूर रखा गया, वह →

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प्रो. एम एम कलबुर्गी की हत्या

नयी दिल्ली : 30 अगस्त : बुद्धिवादी वाम-विचारक और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ विद्वान् प्रो. एम एम कलबुर्गी की हत्या  →

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Ayojan

आज़ाद वतन आज़ाद ज़ुबां -1

‘देश प्रेम के मायने’

दिनांक 12 मार्च 2016 को गांधी शांति प्रतिष्ठान में पांच साहित्यिक संगठनों  – प्रगतिशील लेखक  संघ, जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, दलित लेखक संघ और साहित्य संवाद — ने मिलकर ‘’देश प्रेम के मायने’’ विषय पर  परिचर्चा की । यह ‘ आज़ाद  वतन आज़ाद ज़ुबां’ श्रृंखला की पहली कड़ी थी । कार्यक्रम की शुरुआत में

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बांदा कार्यशाला

जनवादी लेखक संघ केंद्र ने 2-3-4 अक्टूबर, 2015 को बाँदा (उत्तर प्रदेश) में अम्बेडकरवाद और मार्क्सवाद : पारस्परिकता के धरातल विषय पर कार्यशाला आयोजित की उसकी रिपोर्ट पेश है →

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Patrikayen

नयापथ (भीष्म साहनी  विशेषांक)

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Pustak Samiksha

लेडीज़ क्लब : एक समस्या उपन्यास

जब मैं दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में एम. ए. कर रहा था तो पहली बार ‘समस्या नाटक’ जैसी नयी श्रेणी से परिचय हुआ।→

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Jales Khabar

जलेस बांदा इकाई का आयोजन

इलाहाबाद में रवीन्द्र कालिया को श्रद्धांजलि

संजीव के उपन्‍यास फांस पर संगोष्ठी

जलेस केंद्र परिपत्र

साहित्य अकादमी के कार्यकारी मंडल के लिए ज्ञापन

लेखकों, पाठकों और संस्कृतिकर्मियों का मौन जुलूस

प्रो. कलबुर्गी की हत्या के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन

इलाहाबाद में प्रतिरोध

नागौर, राजस्थान में दलित दमन