नंदकिशोर नवल का निधन

नयी दिल्ली : 13 मई : कल, 12 मई की रात 10 बजे हिंदी के लब्धप्रतिष्ठ आलोचक नंदकिशोर नवल का पटना में निधन हो गया| वे 82 वर्ष के थे|

            2 सितंबर 1937 को वैशाली ज़िले के चांदपुरा में जन्मे प्रो. नवल पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से सेवानिवृत्त थे| एक अधीत और अध्यवसायी आलोचक के रूप में उनकी पहचान थी| ‘कविता की मुक्ति’,’हिंदी आलोचना का विकास’, ‘प्रेमचंद का सौंदर्यशास्त्र’, ‘महावीर प्रसाद द्विवेदी’, ‘शब्द जहां सक्रिय हैं’, ‘यथाप्रसंग’, ‘मुक्तिबोध : ज्ञान और संवेदना’, ‘निराला और मुक्तिबोध : चार लंबी कविताएं’, ‘समकालीन काव्य-यात्रा’, ‘दृश्यालेख’, ‘निराला : कृति से साक्षात्कार’, ‘रचना का पक्ष’ इत्यादि उनकी प्रमुख आलोचनात्मक पुस्तकें हैं| उन्होंने ‘असंकलित कविताएं : निराला’, निराला रचनावली (आठ खंड), रुद्र समग्र, ‘रामावतार शर्मा : प्रतिनिधि संकलन’ जैसे महत्त्वपूर्ण ग्रंथों का संपादन भी किया| 1981 से 1985 तक वे नामवर सिंह के साथ ‘आलोचना’ पत्रिका के सह-संपादक रहे और उसे हिंदी की प्रतिनिधि वैचारिक पत्रिका बनाने में उन्होंने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी|

            नवल जी के निधन की अप्रत्याशित सूचना से हिंदी का साहित्यिक समाज शोक-संतप्त है| जनवादी लेखक संघ उनकी स्मृति को सादर नमन करता है|