वीरेन डंगवाल नहीं रहे

जनवादी लेखक संघ हिंदी के प्रतिष्ठित कवि श्री वीरेन डंगवाल की मृत्यु पर गहरा शोक प्रकट करता है. वे लम्बे समय से कैंसर से पीड़ित थे. स्वास्थ्य संबंधी बाधाओं के बावजूद जनपक्षधर संस्कृति-कर्म के साथ उनका जुड़ाव लगातार बना हुआ … Continue reading

दसवां विश्व हिंदी सम्मलेन

जनवादी लेखक संघ का बयान भोपाल में आयोजित दसवें विश्व हिंदी सम्मलेन को हिंदी साहित्य और साहित्यकारों की छाया से जिस तरह दूर रखा गया, वह कतई आश्चर्यजनक नहीं था। एक ऐसे समय में, जब केंद्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ … Continue reading

प्रो. एम एम कलबुर्गी की हत्या

नयी दिल्ली 30 अगस्त :  बुद्धिवादी वाम-विचारक और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ विद्वान् प्रो. एम एम कलबुर्गी की हत्या नरेंद्र दाभोलकर और कामरेड गोविंद पानसारे की हत्या की ही अगली कड़ी है। यह बात संदेह से परे है … Continue reading

दिवंगत जनकवि केदारनाथ अग्रवाल के बांदा स्थित घर

यह बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिवंगत जनकवि केदारनाथ अग्रवाल के बांदा स्थित घर को व्यावसायिक प्रयोजनों से ज़मींदोज़ करने की तैयारियां चल रही हैं. केदार बाबू ने जिस घर में जीवन के 70 साल गुज़ारे, जहां हिंदी के … Continue reading

इंडिया’ज़ डॉटर

ब्रिटिश फ़िल्मकार लेस्ली उडविन के वृत्तचित्र ‘इंडिया’ज डॉटर’ पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाया जाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गहरा आघात है। जनवादी लेखक संघ इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता है और मांग करता है कि इस फ़िल्म पर से … Continue reading

कामरेड जीतेन्द्र रघुवंशी का आकस्मिक निधन

भारतीय जननाट्य संघ (इप्टा) के महासचिव कामरेड जीतेन्द्र रघुवंशी का आकस्मिक निधन प्रगतिशील-जनवादी लेखकों-संस्कृतिकर्मियों के लिए एक स्तब्धकारी सूचना है. आगरा-निवासी रघुवंशी जी को स्वाइन फ्लू की शिकायत पर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भरती कराया गया था, जहां 48 … Continue reading

रायपुर साहित्य-महोत्सव पर जलेस का बयान

12-14 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री रमण सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने जिस साहित्य-महोत्सव का आयोजन किया, उसे जनवादी लेखक संघ असहमति का सम्मान करने के स्वांग और एक राजनीतिक छलावे के रूप में देखता है. जिस … Continue reading

सिविल सेवाओं के इम्तहान; हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाएं

सिविल सेवाओं के इम्तहान में मानविकी के विषयों हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं की उपेक्षा के खिलाफ पिछले एक साल से चल रहा आंदोलन इस महीने एक नए जुझारू दौर में पहुँच गया है।  आन्दोलनरत विद्यार्थियों के अनुसार, २०११ में … Continue reading