नयी दिल्ली : 16 जनवरी 2026 : कवि, आलोचक, संपादक, लोकप्रिय शिक्षक और जसम के अध्यक्ष रह चुके राजेंद्र कुमार का जन्म 24 जुलाई 1943 को कानपुर में हुआ था। पिछले एक वर्ष से वे कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहे थे। डॉक्टरों के जवाब दे देने के बावजूद भी वे सक्रिय बने हुए थे। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 16 जनवरी 2026 को उनका निधन हो गया।
राजेंद्र कुमार इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष रहे थे। अपने अध्यापन काल में वे एक लोकप्रिय शिक्षक के रूप में जाने जाते थे। इलाहाबाद में उनकी सक्रियता देखते ही बनती थी। शहर के बाहर भी वे गोष्ठियों में सक्रिय भागीदारी करते थे। अपने विनम्र व्यवहार से वे सभी को अपना प्रिय बना लेते थे।
आपातकाल और उसके बाद लिखी उनकी कविताओं ने लोगों का ध्यान खींचा था। ‘ऋण गुणा ऋण’, ‘हर कोशिश है एक बग़ावत’, ‘लोहा लक्कड़’ उनके चर्चित कविता संग्रह हैं। ‘आईना द्रोह’ उनकी लंबी कविता है जो एक पुस्तिका के रूप में प्रकाशित हुई थी।
उनकी ख्याति एक आलोचक के रूप में अधिक थी। ‘प्रतिबद्धता के बावजूद’, ‘शब्द-घड़ी में समय’, ‘यथार्थ और कथार्थ’, ‘कविता का समय’, ‘साहित्य में सृजन के आयाम और विज्ञानवादी दृष्टि’ जैसी पुस्तकों ने उन्हें आलोचक के रूप में प्रसिद्धि दी। उन्होंने साहित्य अकादमी के लिए इलाचंद्र जोशी पर मोनोग्राफ लिखा था।
वे एक संपादक के रूप में भी प्रसिद्ध थे। लंबे समय तक उन्होंने ‘अभिप्राय’ पत्रिका का संपादन किया था। वे कुछ समय के लिए ‘बहुवचन’ पत्रिका के भी संपादक थे। ‘साही के बहाने समकालीन रचनाशीलता पर एक बहस’, ‘आलोचना का विवेक’, ‘प्रेमचंद की कहानियाँ : परिदृश्य और परिप्रेक्ष्य’, ‘स्वाधीनता की अवधारणा और निराला’ उनके द्वारा संपादित पुस्तकें हैं। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें कई संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत भी किया गया था।
राजेंद्र कुमार जी आजीवन जसम से जुड़े रहे। उनका निधन प्रगतिशील आंदोलन की बहुत बड़ी क्षति है। जनवादी लेखक संघ राजेंद्र कुमार जी के निधन पर अपनी शोक संवेदना व्यक्त करता है और उनकी स्मृति को नमन करता है।