राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा ढहाये जाने पर

महान घुमक्कड़ और मनुष्यमात्र की बराबरी का सपना देखने वाले महापण्डित राहुल सांकृत्यायन की आदमक़द प्रतिमा दिनांक 12 जुलाई 2026 की रात ‘अज्ञात’ उपद्रवियों द्वारा ग़ायब कर दी गयी। अगले दिन इसका पता स्थानीय लोगों को लगा। 14 जुलाई को थाने में रिपोर्ट लिखवाई गयी। ‘तुम्हारे धर्म की क्षय’, ‘तुम्हारे ईश्वर की क्षय’ जैसी पुस्तिकाओं और ‘दर्शन-दिग्दर्शन’, ‘मध्य एशिया का इतिहास’, ‘वोल्गा से गंगा’ जैसे महान ग्रंथों के लेखक से कौन-सी शक्ति बैरभाव रखती होगी, यह रहस्य नहीं है। राहुल सांकृत्यायन की नौ फुट ऊंची यह प्रतिमा रानीगंज (पश्चिम बंगाल) में स्थापित थी। इसकी स्थापना उनकी जन्मशती के अवसर पर 1994 में हुई थी। वर्धमान जिले के अंतर्गत रानीगंज में ‘राहुल सांकृत्यायन जन्मशती आयोजन समिति’ द्वारा ईस्टर्न कोलफ़ील्ड्स लिमिटेड और कोलियरी मज़दूर सभा ऑफ़ इंडिया की पहल और प्रयासों से स्थापित यह प्रतिमा उस बौद्धिक विरासत और समतामूलक दृष्टि का स्मरण कराती थी जिसे इस देश का संघर्षशील श्रमशील तबक़ा अपने दिल के क़रीब मानता है।

पिछले विधानसभा सभा चुनाव में छल-बल और अपवित्र गठबंधन से त्रिपुरा की सत्ता पर क़ाबिज होने के बाद इन्हीं ताक़तों ने महान क्रांतिकारी लेनिन की मूर्ति ढहायी थी। असल में हर वह व्यक्ति और विचार इन्हें असह्य लगता है जो आम जनता की तरफ़दारी करे और दुनिया को न्यायपूर्ण, प्रेमपूर्ण बनाने की कामना करे। इस ध्वस्तीकरण से व्यथित राहुल सांकृत्यायन के पुत्र 72 वर्षीय प्रो. जेता सांकृत्यायन ने 17 जुलाई को जनता के नाम जो पत्र जारी किया है उसे पढ़ा जाना चाहिए। अपने पत्र में प्रो. जेता ने उचित ही दर्ज किया है कि ‘रानीगंज में राहुल जी के स्मारक पर हमला मज़बूत कोलियरी ट्रेड यूनियनों को ख़त्म करने और ईस्टर्न कोलफ़ील्ड्स को भारत के नये ‘ऊर्जा-सरदारों’ (एनर्जी-बैरन्स) के हाथों में सौंपकर निजीकरण करने की भगवा लहर की एक और कड़ी है…।’ राष्ट्र की तमाम संपदा को निजी हाथों में सौंपने वाले न राष्ट्र के हैं और न धर्म के। अयोध्या सहित कई धर्म-स्थलों पर इनकी लूट की कलई खुल चुकी है और जनता इनकी वास्तविकता से नये सिरे से परिचित हो रही है। ऐसे वातावरण में इन दक्षिणपंथियों की बौखलाहट स्वाभाविक है और वे मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए किसी भी छोर तक जा सकते हैं।

जनवादी लेखक संघ (जलेस) जनद्रोही बर्बरों द्वारा राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा ढहाये जाने का कड़ा प्रतिवाद करता है। ऊंचे स्वर में उसकी मांग है कि अपराधियों की पहचान करके उन्हें गिरफ़्तार किया जाये और प्रकियानुसार उन्हें कठोर दंड मिले। नयी प्रतिमा बनवाकर उसी स्थल पर उसे पुनर्स्थापित किया जाये और उसके रखरखाव का उचित बंदोबस्त हो। राहुल सांकृत्यायन के विचारों और पुस्तकों को जनता तक ले जाने की अपनी ज़िम्मेदारी को जलेस फिर से और पूरी दृढ़ता से रेखांकित करता है।


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